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दिल्ली में 12वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डिसेबिलिटी और नेशनल एबिलिम्पिक्स का शुभारंभ




नई दिल्ली — 12वां नेशनल एबिलिम्पिक्स स्किल कॉम्पिटिशन और 12वां नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन डिसेबिलिटी (एनसीडी) आज सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (सीएसओआई), नई दिल्ली में शुरू हुआ। यह आयोजन देश में दिव्यांगजनों के लिए समावेशन, कौशल विकास और मजबूत सपोर्ट सिस्टम बनाने पर काम करने वाले प्रमुख राष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म के रूप में जाना जाता है। इसे सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट और नेशनल एबिलिम्पिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनएएआई) ने मिलकर आयोजित किया है, जिसमें दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्‍लूडी), टीपीसीडीटी और इंडसइंड बैंक का सहयोग मिला है। यह आयोजन चार रीजनल एबिलिम्पिक्स के सफल समापन के बाद आयोजित किया गया है, जिससे इस नेशनल सिलेक्शन का महत्व और बढ़ गया है।

पहले दिन डॉ. विनीत जोशी, यूजीसी के चेयरमैन (मुख्य अतिथि), श्री राजीव कुमार, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त, और श्री हिमल तिवारी, टाटा पावर के सीएचआरओ व चीफ़ सीएसआर एंड सस्‍टेनेबिलिटी जैसे प्रतिष्ठित अतिथि शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने कहा कि भारत में डिसेबिलिटी इनक्लूजन को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए सरकार, कॉरपोरेट और सिविल सोसायटी के बीच मजबूत साझेदारी बेहद ज़रूरी है। उन्होने जोर देते हुए कहा, नेशनल एबिलिम्पिक्स सिर्फ़ कौशल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह दिव्यांगजनों की आजीविका, सम्मान और दीर्घकालिक सशक्तिकरण का रास्ता भी बनाता है।

नेशनल एबिलिम्पिक्स में 20 से अधिक राज्यों के 59 रीजनल मेडलिस्ट हिस्सा ले रहे हैं। ये प्रतिभागी 500 से अधिक क्षेत्रीय प्रतियोगियों में से चुने गए हैं। आईसीटी (इंजीनियरिंग डिज़ाइन, डीटीपी, फ़ोटोग्राफ़ी), क्राफ्ट्स (बास्केट मेकिंग, क्रोशिया, पेंटिंग एवं  डेकोरेशन), हॉस्पिटैलिटी (केक डेकोरेशन, पेस्ट्री, क्लीनिंग सर्विसेज़) और सर्विसेज़ (हेयरड्रेसिंग, मसाज) जैसी विभिन्न कैटेगरी में आज प्रतिभागी अपना कौशल दिखा रहे हैं। नेशनल स्तर के विजेता फिनलैंड में 2027 में होने वाले 11वें इंटरनेशनल एबिलिम्पिक्स के लिए भारत का प्रतिनिधित्व करने के और करीब होंगे जिसे वैश्विक स्तर पर “दिव्यांगजनों के वर्क स्किल ओलंपिक्स” कहा जाता है।

मुख्य अतिथि डॉ. विनीत जोशी ने कहा “आज जो देखा, उसने साफ़ दिखाया कि कमी दिव्यांगजनों में नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम में है, जो उन्हें बराबर अवसर नहीं देता। सार्थक का लाइफ़-साइकल मॉडल दिखाता है कि संवेदनशीलता और सही नीयत से बड़ा बदलाव संभव है। हमें नई शिक्षण पद्धतियों, बेहतर टेस्टिंग और एक ऐसी यूनिवर्सिटी की ज़रूरत है जो पीडब्‍लूडी के लिए विशेषज्ञ तैयार करे। इंसानियत गाइडलाइन से पहले होनी चाहिए तभी दिव्यांग बच्चे विकसित भारत 2047 का हिस्सा बन पाएँगे।”

पहले दिन उद्घाटन समारोह में सार्थक ने मार्टसारथी नाम का नया नेशनल इंटरफ़ेस की घोषणा की गई , जिसके ज़रिए दिव्यांगजन अब बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म्स पर आसानी से खरीदा और बेच सकते हैं|

एनएएआई के सेक्रेटरी-जनरल और सार्थक एजुकेशनल ट्रस्ट के फाउंडर-सीईओ डॉ. जितेंद्र अग्रवाल ने कहा- “अगर हमें भारत में डिसेबिलिटी इनक्लूजन को आगे बढ़ाना है, तो बदलाव ज़रूरी हैं। देश में 70% रिहैबिलिटेशन प्रोफेशनल्स की कमी है, स्पेशल एजुकेटर्स आधे से भी कम हैं और पूरे भारत में 60 से कम एक्सेसिबिलिटी ऑडिटर्स हैं। ऐसे में 2.68 करोड़ दिव्यांगजनों को सही सपोर्ट मिलना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसलिए हम यूजीसी से निवेदन करते हैं कि सार्थक ग्लोबल यूनिवर्सिटी को डीम्‍ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा देने पर गंभीरता से विचार किया जाए।”

उन्होंने बताया कि सार्थक ट्रेनिंग, प्लेसमेंट और रिहैबिलिटेशन के माध्यम से अब तक 1.25 लाख से अधिक दिव्यांगजनों को सशक्त बना चुका है और विभिन्न अभियानों के ज़रिए 53 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुँच बना चुका है। देशभर के 2,000+ छोटे बडे शहरओ  जिनमें 60% ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं में सार्थक शुरुआती हस्तक्षेप, शिक्षा और रोज़गार से जुड़ी स्किलिंग को मजबूत कर रहा है।

जैसे-जैसे प्रतियोगिताएँ दूसरे दिन की ओर बढ़ रही हैं, अब सभी की निगाहें नेशनल विनर्स की घोषणा पर टिकी हैं। चयनित प्रतिभागी फिनलैंड 2027 के इंटरनेशनल एबिलिम्पिक्स के लिए अपनी ट्रेनिंग शुरू करेंगे। रिकॉर्ड भागीदारी, सरकारी और कॉरपोरेट सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की उपस्थिति ने 12वें NCD और नेशनल एबिलिम्पिक्स को एक महत्वपूर्ण मुकाम दिया है जो भारत की इस प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है कि हर दिव्यांग व्यक्ति के लिए एक समान और समावेशी भविष्य बनाया जाए।

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